Google DeepMind का नया AI Scam Detector क्या है?
ऑनलाइन ठगी के तरीके लगातार बदल रहे हैं। अब ठग सिर्फ नकली लिंक नहीं भेजते, बल्कि बैंक कर्मचारी, सरकारी अधिकारी या किसी परिचित की पहचान बनाकर लोगों का भरोसा जीतने की कोशिश भी करते हैं।
इसी समस्या से निपटने के लिए Google DeepMind और Singapore की सरकारी तकनीकी एजेंसी GovTech ने एक AI आधारित Scam Detector विकसित किया है। इसकी घोषणा 14 अक्टूबर 2026 को Singapore International Cyber Week के दौरान की गई।
Google DeepMind की आधिकारिक घोषणा के मुताबिक, यह मॉडल स्मार्टफोन पर चलने के लिए तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य संदिग्ध बातचीत के संकेत पहचानना और यूजर को समय रहते सावधान करना है।

यह AI ठगी कैसे पहचानेगा?
इस सिस्टम में Google के Gemma AI मॉडल का इस्तेमाल किया गया है। इसे Singapore में सामने आने वाले ठगी के तरीकों से जुड़े उदाहरणों के आधार पर तैयार किया गया है।
मॉडल बातचीत के शब्दों के साथ उसके संदर्भ और व्यवहार को भी समझने की कोशिश करता है। उदाहरण के लिए, अगर कोई व्यक्ति बैंक कर्मचारी बनकर बातचीत करे और बाद में पैसे या संवेदनशील जानकारी मांगे, तो सिस्टम बातचीत में मौजूद ठगी के संभावित संकेत पहचान सकता है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि AI हर तरह की ठगी पकड़ लेगा। नए तरीके, अलग-अलग भाषाएं और सामान्य दिखने वाली संदिग्ध बातचीत अब भी चुनौती हो सकते हैं।
दो चरणों में काम करेगा AI
Google DeepMind के मुताबिक, इस तकनीक में दो स्तरों पर जांच की जाती है।
पहला चरण: एक हल्का AI सिस्टम आने वाले संदेशों की शुरुआती जांच करता है। इसका उद्देश्य कम समय और कम संसाधनों में संभावित खतरे पहचानना है।
दूसरा चरण: अगर पहली जांच में शक होता है, तो fine-tuned Gemma मॉडल बातचीत के बड़े संदर्भ का विश्लेषण करता है। इसके बाद सिस्टम ठगी के संभावित संकेतों के आधार पर चेतावनी दे सकता है।
इस तरीके से हर संदेश पर बड़े AI मॉडल को चलाने की जरूरत कम हो सकती है। इससे फोन की बैटरी और कंप्यूटिंग संसाधनों पर दबाव कम रखने में मदद मिल सकती है।
इस तकनीकी प्रक्रिया की जानकारी Google DeepMind की आधिकारिक रिपोर्ट में दी गई है।
निजी बातचीत की सुरक्षा कैसे होगी?
AI आधारित सुरक्षा टूल्स के साथ एक बड़ा सवाल यह है कि क्या वे निजी बातचीत को कंपनी के सर्वर पर भेजते हैं।
इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य जांच को सीधे स्मार्टफोन पर करना है। इससे हर बार निजी संदेशों को क्लाउड सर्वर पर भेजने की जरूरत कम हो सकती है।
Google DeepMind के मुताबिक, मॉडल को प्रशिक्षित करने के लिए anonymised डेटा का इस्तेमाल किया गया और निजी पहचान बताने वाले नागरिक डेटा को प्रशिक्षण से बाहर रखा गया।
यह कंपनी की बताई गई व्यवस्था है। वास्तविक इस्तेमाल में सिस्टम कौन-सा डेटा प्रोसेस करेगा, कितनी बैटरी खर्च होगी और कितनी बार गलत चेतावनी देगा, इन सवालों पर स्वतंत्र परीक्षण जरूरी हैं।
Singapore के समाचार संस्थान Channel NewsAsia की रिपोर्ट में भी इस साझेदारी और डिवाइस पर ही ठगी पहचानने की योजना का उल्लेख है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह खबर?
भारत में UPI, मोबाइल बैंकिंग, WhatsApp और फोन कॉल के जरिए होने वाली ठगी लोगों के लिए बड़ी चिंता है। कई मामलों में ठग तकनीकी कमजोरी के बजाय बातचीत और भरोसे का फायदा उठाते हैं।
ऐसे में फोन पर चलने वाला AI भविष्य में उपयोगी हो सकता है। अगर यह संदिग्ध बातचीत के दौरान समय रहते चेतावनी दे, तो यूजर को पैसे भेजने या निजी जानकारी साझा करने से पहले दोबारा सोचने का मौका मिल सकता है।
हालांकि, फिलहाल यह Singapore-केंद्रित प्रोजेक्ट है। भारत में इसे लॉन्च करने या हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं के लिए उपलब्ध कराने की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
भारत में उपयोगी बनाने के लिए इस मॉडल को स्थानीय भाषाओं, क्षेत्रीय ठगी के तरीकों और भारतीय डिजिटल भुगतान के संदर्भों के अनुसार जांचना होगा।
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क्या यह हर तरह की ऑनलाइन ठगी रोक सकता है?
नहीं। यह तकनीक सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत हो सकती है, लेकिन पूरी सुरक्षा की गारंटी नहीं देती।
- गलत चेतावनी: सामान्य बातचीत को भी सिस्टम संदिग्ध समझ सकता है।
- नए तरीके: ठग अपना तरीका बदलकर AI को चकमा देने की कोशिश कर सकते हैं।
- भाषा की चुनौती: हिंदी, अंग्रेजी और दूसरी भाषाओं के मिले-जुले संदेशों को समझना कठिन हो सकता है।
- डिवाइस की क्षमता: मॉडल की गति, बैटरी खर्च और फोन की क्षमता भी महत्वपूर्ण होगी।
इसलिए यूजर को अनजान व्यक्ति के कहने पर OTP, पासवर्ड या बैंक की जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। पैसे भेजने से पहले व्यक्ति की पहचान की पुष्टि करना अब भी जरूरी है।
हमारी राय
Google DeepMind और Singapore का यह प्रोजेक्ट AI सुरक्षा और प्राइवेसी को साथ लेकर चलने की कोशिश करता है। अगर फोन पर चलने वाला AI संदिग्ध बातचीत को समय रहते पहचान सके, तो लोगों को ठगी से बचने का एक अतिरिक्त मौका मिल सकता है।
लेकिन इसकी वास्तविक उपयोगिता का फैसला स्वतंत्र परीक्षण, गलत चेतावनियों की दर और आम स्मार्टफोन पर मिलने वाले परिणामों से होगा।





