उस रात शहर पर तेज़ बारिश हो रही थी। बाकी लोग अपने घरों में बंद थे, लेकिन मीरा अकेली उस पुरानी इमारत की छत पर बैठी थी। उसके हाथ में उसका पुराना कैमरा था और नज़र आसमान में छिपे चाँद पर टिकी थी। वह पिछले कई दिनों से इसी पल का इंतज़ार कर रही थी, क्योंकि उसकी माँ की आखिरी इच्छा थी कि वह बारिश से घिरे चाँद की एक तस्वीर खींचे। हवा उसके नारंगी बालों को चेहरे पर ला रही थी और कैमरे पर बारिश की बूंदें गिर रही थीं। अचानक बादल थोड़ा हटे और चाँद पूरी चमक के साथ सामने आ गया। मीरा ने कैमरा उठाया, सांस रोककर शटर दबाया और तस्वीर कैद कर ली। कैमरे की स्क्रीन पर तस्वीर देखते ही उसकी आँखों में आँसू आ गए। तस्वीर में चाँद के नीचे एक हल्की-सी परछाईं दिखाई दे रही थी, बिल्कुल उसी तरह जैसे उसकी माँ पुराने फोटो में उसके पीछे खड़ी हुआ करती थी। मीरा ने घबराकर पीछे देखा, लेकिन वहाँ कोई नहीं था। सिर्फ बारिश, हवा और खाली छत। उसने फिर कैमरे की स्क्रीन देखी। वह परछाईं अब भी तस्वीर में मौजूद थी। उसी पल उसके फोन पर एक पुराना, बंद पड़ा नंबर चमका और एक संदेश आया, “अब मेरी तस्वीर पूरी हो गई।” मीरा के हाथ कांपने लगे। उसने आसमान की ओर देखा। बादल फिर से चाँद को ढक चुके थे, लेकिन इस बार उसके चेहरे पर आँसू नहीं थे। वह मुस्कुराई, कैमरा अपने सीने से लगाया और धीरे से बोली, “माँ, मैं समझ गई।” अगली सुबह जब सूरज निकला, मीरा उस छत पर नहीं थी। वहाँ सिर्फ उसका कैमरा पड़ा था, और उसकी आखिरी तस्वीर में एक लड़की बारिश के बीच चाँद की ओर मुस्कुराते हुए दिखाई दे रही थी।









